आज के इस ज़माने में अगर कोई भी इंसान थोड़ा भी पैसा कमा रहा है तो वह सरकारी प्राइमरी स्कूल को अछूत समझकर अपने बच्चे को बड़े बड़े निजी स्कूल में ही पढ़ रही है, लेकिन आज एक ऐसी मिशाल इस समाज में एक महिला ने दी है जो वहाँ है काफी गर्व महसूस कर रहा है। यह मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ के रजपुरा इलाके के सरकारी प्राइमरी स्कूल की टीचर पुष्पा यादव से जुड़ा हुआ है जिसने अपनी मेहनत से लोगों की इस धारणा को बदल दिया है।
पहने हुए तो यह स्कूल है सरकारी है ’, लेकिन इस स्कूल ने इलाके के बड़े बड़े प्राथमिक स्कूलों को मात दे दी है। बच्चे जमीन पर नहीं बैठते। फर्नीचर है। टेंट लगे हुए हैं। दीवारों पर पेंटिंग है। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था है। समर कैंप होता है। यहाँ तक कि बच्चों के लिए पुस्तकालय है।
पहने हुए तो यह स्कूल है सरकारी है ’, लेकिन इस स्कूल ने इलाके के बड़े बड़े प्राथमिक स्कूलों को मात दे दी है। बच्चे जमीन पर नहीं बैठते। फर्नीचर है। टेंट लगे हुए हैं। दीवारों पर पेंटिंग है। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था है। समर कैंप होता है। यहाँ तक कि बच्चों के लिए पुस्तकालय है।



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